हिसाब-किताब हम से न पूछ अब, ऐ-ज़िन्दगी

*हिसाब-किताब हम से न पूछ अब, ऐ-ज़िन्दगी*,
*तूने सितम नही गिने, तो हम ने भी ज़ख्म नही गिने!*